भोपालमध्य प्रदेश

जिला ब्यूरो रिपोर्ट

स्वतंत्रता दिवस पर हुआ शहीद पार्क का अनावरण,35-40 वर्षों के नक्सल संघर्ष की गाथा को समर्पित हुआ स्मृति स्थल

 

तिरंगे में सजा शहीद पार्क, नक्सल मुक्त बालाघाट के वीर जवानों को नमन

स्वतंत्रता दिवस पर हुआ शहीद पार्क का अनावरण,35-40 वर्षों के नक्सल संघर्ष की गाथा को समर्पित हुआ स्मृति स्थल

बालाघाट। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर बालाघाट को नक्सलवाद के लंबे प्रकोप से मुक्त कराने के संघर्ष में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर पुलिसकर्मियों, सीआरपीएफ एवं हॉक फोर्स के जवानों की स्मृति को समर्पित शहीद पार्क का लोकार्पण अंबेडकर चौक स्थित परिसर में किया गया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर संपूर्ण शहीद पार्क को तिरंगे के रंगों से सजाया एवं रंगा गया, जो देश की आजादी और वीर शहीदों के प्रति सम्मान का प्रतीक बना। तिरंगे की आभा में सजे इस पार्क के माध्यम से वीर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों, सुरक्षा बलों एवं बड़ी संख्या में नागरिकों ने पहुंचकर शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और वीर जवानों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस दौरान “भारत माता की जय” और वीर शहीदों के बलिदान की जय के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

अनेक जनप्रतिनिधि एवं पदाधिकारी रहे उपस्थित

लोकार्पण कार्यक्रम में पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रमेश रंगलानी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा बिसेन, लता एलकर, मौसम बिसेन, नगर अध्यक्ष राकेश सेवईवार,रमाकांत ढाहाके, जिला पदाधिकारी जितेंद्र मोहारे, गोपाल आडवाणी, अभय कोचर, रूपेश वैद्य, महेंद्र सुराना, अभय सेठिया, दिलीप चौनोसिया, गणेश अग्रवाल, यशवंत लिल्हारे, राजेश लिल्हारे, जैनेंद्र कटरे, गजेंद्र भारद्वाज, विशाल मंगलानी, बिट्टू कौशल, चित्रवर्ण शुक्ला सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

नगर पालिका की ओर से नगर पालिका उपाध्यक्ष योगेश बिसेन, सभापति समीर जैस्वाल, संगीता खगेस कावरे, संगीता छोटू थापा, योगिता विनय बोपचे, उज्ज्वल आमाडारे, वकील वाधवा, कमलेश पांचे, पार्षद राज हरीन खेड़े, रेना धीरज सुराना, मानक बर्वे,मनीष नेमा सहित अनेक पार्षद एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्य नगरपालिका अधिकारी सूर्यप्रकाश उके भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

पुलिस एवं सुरक्षा बलों ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि

पुलिस विभाग की ओर से सीएसपी अमन मिश्रा, एसटीएम गोपाल सोनी सहित पुलिस अमले ने भी शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। विधिवत पूजन-अर्चन के पश्चात शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की गई और उनके बलिदान को नमन किया गया।

नक्सलवाद के खिलाफ 35-40 वर्षों के संघर्ष की स्मृति

नगरपालिका अध्यक्ष भारती सुरजीत ठाकुर ने कहा कि यह शहीद पार्क केवल एक उद्यान नहीं, बल्कि बालाघाट के उस कठिन संघर्ष और बलिदान की स्मृति है, जिसे जिले ने लगभग 35-40 वर्षों तक नक्सलवाद के रूप में झेला है।

उन्होंने कहा कि बालाघाट को नक्सलवाद से मुक्त कराने के संघर्ष में जिले और प्रदेश के अनेक पुलिसकर्मियों, सीआरपीएफ एवं हॉक फोर्स के जवानों तथा अधिकारियों ने अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। यह पार्क उन्हीं वीर जवानों को समर्पित है, जिन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए मातृभूमि और समाज की सुरक्षा के लिए अपना जीवन न्योछावर किया।

आने वाली पीढ़ियों को बताएगा बालाघाट का नक्सल संघर्ष

शहीद पार्क में नक्सल विरोधी अभियानों में वीरगति प्राप्त करने वाले जवानों के नाम, फोटो और उनके बलिदान से संबंधित जानकारी प्रकाश पट्टिकाओं एवं दीवारों पर अंकित की जाएगी। इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को यह बताना है कि बालाघाट किस तरह लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा और हमारे वीर जवानों ने किस साहस और संघर्ष के साथ इस चुनौती का सामना किया।

यह पार्क आने वाली पीढ़ी को यह भी बताएगा कि आज जिस सुरक्षित वातावरण में बालाघाट विकास की नई संभावनाओं की ओर बढ़ रहा है, उसके पीछे अनेक वीर जवानों का त्याग और बलिदान है।

नक्सल मुक्त बालाघाट से खुलीं विकास की नई संभावनाएं

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बालाघाट का नक्सल मुक्त होना जिले के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। नक्सलवाद की समाप्ति के बाद जिले में उद्योग, व्यापार, पर्यटन एवं अन्य आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की नई संभावनाएं बनी हैं। शांति और सुरक्षा का वातावरण जिले के विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है।

इस अवसर पर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के प्रति आभार व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, नक्सलवाद के विरुद्ध बनाई गई प्रभावी एवं समन्वित कार्ययोजना तथा सुरक्षा बलों को उपलब्ध कराए गए संसाधनों के कारण नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता प्राप्त हुई है।

साथ ही मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व एवं प्रदेश सरकार के विशेष सहयोग और योगदान को भी इस अभियान की सफलता में महत्वपूर्ण बताया गया। केंद्र एवं राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों, पुलिस प्रशासन तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई से बालाघाट आज नक्सलवाद से मुक्त होकर विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण लंबे समय तक रही चुनौती

महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ की सीमाओं से लगे होने के कारण बालाघाट में नक्सल विरोधी अभियान के सामने लंबे समय तक विशेष चुनौती रही। कई बार नक्सली घटनाओं को अंजाम देने के बाद सीमा बदलकर दूसरे क्षेत्र में चले जाते थे, जिससे कार्रवाई प्रभावित होती थी।

केंद्र एवं राज्य सरकार की रणनीति, पुलिस प्रशासन और केंद्रीय सुरक्षा बलों के बेहतर समन्वय तथा संयुक्त अभियानों के माध्यम से इस चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया गया। इसी सतत संघर्ष और प्रभावी कार्रवाई का परिणाम है कि आज बालाघाट नक्सलवाद से मुक्त होकर विकास की नई संभावनाओं की ओर अग्रसर है।

शहीदों की स्मृति को डीआईजी कार्यालय से मोती उद्यान तक विस्तार देने की योजना

नगरपालिका अध्यक्ष ने बताया कि शहीद पार्क को भविष्य में और विस्तारित करने की योजना है। इसे अंबेडकर चौक से डीआईजी कार्यालय, कोतवाली होते हुए मोती उद्यान तक विकसित करने की परिकल्पना है। इस पूरे क्षेत्र को शहीदों की स्मृतियों और उनके बलिदान की गौरवगाथा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

तिरंगे के रंग में रंगा पार्क बना श्रद्धांजलि का प्रतीक

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पूरे शहीद पार्क को तिरंगे के तीनों रंगों से सजाया गया, जिससे पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। तिरंगे की इस सजावट के बीच शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित कर वीर जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। यह दृश्य स्वतंत्रता दिवस और नक्सल मुक्त बालाघाट—दोनों उपलब्धियों को एक साथ जोड़ते हुए भावुक और गौरवपूर्ण वातावरण बना रहा था।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, पुलिसकर्मियों एवं नागरिकों ने शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की। “भारत माता की जय” तथा “वीर शहीद अमर रहें” के जयघोष से पूरा परिसर गूंजायमान रहा।

शहीद पार्क अब बालाघाट के उन वीर सपूतों की अमर स्मृति का प्रतीक रहेगा, जिन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया और आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति, साहस, कर्तव्य और बलिदान की प्रेरणा देते रहेंगे।

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  • खबर एमपी न्यूज़ एक्सप्रेस'

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