4639
विधायक अनुभा मुंजारे ने महिला सशक्तिकरण व जलजीवन मिशन पर रखा प्रभावी वक्तव्य

आत्मनिर्भर व भागीदारी सुनिश्चित हुये बगैर महिला सशक्तिकरण नहीं हो सकता-अनुभा मुंजारे
विधायक अनुभा मुंजारे ने महिला सशक्तिकरण व जलजीवन मिशन पर रखा प्रभावी वक्तव्य
महिलाओं को आत्मनिर्भर व उनकी भागीदारी सुनिश्चित किये बगैर महिला सशक्तिकरण नहीं हो सकता। महिलाओं का सशक्तिकरण करने के लिये उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करना होगा। इसके लिये हर क्षेत्र में महिलाओं के प्रतिनिधितत्व को भी सुनिश्चित करने होगें। यह बात बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे ने महिला सशक्तिकरण और जलजीवन मिशन को लेकर विधानसभा सत्र में प्रभावी सुझाव के रूप में अपना वक्तव्य दिया। बता देवें कि प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की ओर से इस विशेष सत्र में बालाघाट की कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे को प्रदेश की विधानसभा के 69 वर्ष पूरे होने पर आयोजित किये गये विशेष सत्र में कांग्रेस की ओर से प्रतिनिधितत्व करने के लिये मौका दिया गया था। विशेष सत्र में सुझाव देते हुये विधायक अनुभा मुंजारे ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश की साक्षरता दर 69.24 प्रतिशत है। जिसमें महिला साक्षरता का प्रतिशत 59.24 प्रतिशत है। जिसे बढ़ाया जाना चाहिए और इसे शत प्रतिशत लक्ष्य करना चाहिए। उन्होने कहा कि आर्थिक सशक्तिकरण में महिलाओं की श्रम भागीदारी का प्रतिशत सिर्फ 20 प्रतिशत है। जिसे बढ़ाया जाना चाहिए। इसी तरह से प्रदेश में 5 लाख 3145 स्व सहायता समूह है और उसमें 62 लाख 30 हजार महिलाओं की ही भागीदारी है। जिसे बढ़ाये जाने की जरूरत है। उन्होने कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरों के आंकड़े में मध्यप्रदेश में प्रति महीने 32 हजार अपराध दर्ज हो रहे है। महिला अत्याचार व हिंसा के मामले में मध्यप्रदेश का देश में 5 वें स्थान पर नाम है। हमें इसे गंभीरता से लेना चाहिए और कठोर कानून बनाकर महिला सुरक्षा को कायम करने चाहिए। विधायक अनुभा मुंजारे ने कहा कि प्रदेश में 230 विधानसभा में से सिर्फ 27 महिला जनप्रतिनिधि है। मेरा मानना है कि यह संख्या बढ़नी चाहिए। ताकि राजनीतिक स्तर पर भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ सके। उन्होने कहा कि महिलाओं को अस्पताल में उपचार तथा सुविधाओं को और अधिक सशक्त बनाये जाने की जरूरत है। चिकित्सक व नर्स सहित जो सुविधा दी जा रही है उनको लेकर सुनिश्चितता होने चाहिए ताकि हमारी महिलायें का जच्चा व बच्चा के साथ जीवन सुरक्षित रह सके। उन्होने कहा कि प्रदेश में बहुतायत में आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवन में चल रहे है। जिसके भवन बनाया जाना चाहिए। आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता व सहायिकाओं के मानदेय कम है उसे बढ़ाया जाये और नियमित मानदेय प्रदाय किया जाये। भोजन बनाने का कार्य कर रही समूह की रसोईयां को महज 500 रूपये का मानदेय दिया जा रहा है उसमें बढ़ाकर 2 हजार रूपये किया जाये। उन्होने सुझाव दिया कि महिला सशक्तिकरण के लिये महिलाओं के हित में कई कार्य ऐसे है जो उनके पिछड़ेपन को स्पष्ट करता है। जिसके लिये हमें कार्य करने होगें। उन्होने कहा कि महिला के स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मनिर्भर बनाने के लिये कार्य करने होगें। उन्होने जल जीवन मिशन के तहत सुझाव देते हुये कहा कि प्रदेश में प्रदेश के 112 लाख ग्रामीण घरों में से 77 लाख घरोंं में ही अर्थात 69 प्रतिशत घरों में नल जल कनेक्शन पहुंचा है। जिसमें भी 31 प्रतिशत घरों में पाईप लाईन नहीं पहुंची है। जिसे शत प्रतिशत करने चाहिए। प्रमाणित मानक के अनुसार 55 लीटर प्रतिदिन जल उपलब्ध कराया जाना है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। नेशनल फेमिली पाईप की रिपोर्ट के अनुसार कुल 28 प्रतिशत ही जल उपलब्ध हो रहा है। जिसमें शहरी में 48 प्रतिशत व ग्रामीण में सिर्फ 23 प्रतिशत जल उपलब्ध होने का प्रतिशत है। जो कि ठीक नहीं कहा जा सकता है। हमें इस दिशा में कार्य करते हुये यह सुनिश्चित करना चाहिए की हर घर में जल सुनिश्चित होवें। जल सुनिश्चित होने के साथ यह भी सुनिश्चित होवें कि दोनों समय जल उपलब्ध कराया जा सके। बुदेंलखंड व मालवा के क्षेत्र में आयरन व फ्लोराइड युक्त पानी उपलब्ध होता है। उन क्षेत्र में जल सुद्धीकरण के लिये संयंत्र स्थापित किया जाये। ताकि शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सके। उपरोक्त विषयों पर अमल होवें तो निश्चित ही हमारी बहनें सशक्त व आत्मनिर्भर होगी और उनका जीवन भी सुदृढ़ हो सकेगा।













