भस्म की खुशबू और डमरू की गूंज: ढाई बजे खुले महाकाल के पट, दिव्य आरती के साथ शुरू हुआ महाशिवरात्रि का महापर्व
अवंतिका नगरी में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। रविवार तड़के ठीक ढाई बजे विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर मंदिर के कपाट शंखध्वनि और जय महाकाल के उद्घोष के साथ खोले गए। पट खुलते ही पूरा वातावरण शिवमय हो गया और बाबा की दिव्य भस्म आरती की गई, जिसे निहारने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा।
मंदिर के पंडित आशीष पुजारी ने बताया कि मंदिर प्रशासन ने इस बार ऐसी अभूतपूर्व व्यवस्था की है कि बाबा के पट अगले 44 घंटों तक अनवरत खुले रहेंगे, जिससे हर भक्त अपने आराध्य की एक झलक पा सकेगा। परंपरा के अनुसार, सबसे पहले बाबा महाकाल को हरिओम जल अर्पित किया गया, जिसके बाद पंडे-पुजारियों ने केसर, चंदन और उबटन लगाकर विशेष पूजन किया।
पंडित आशीष पुजारी ने जानकारी दी कि दूध, दही, घी, शहद और फलों के रसों से अभिषेक के पश्चात भांग और सूखे मेवों से भगवान का अलौकिक श्रृंगार कर उन्हें भस्म अर्पित की गई। आरती के दौरान एक क्षण ऐसा भी आया जब मंदिर की लाइटें बंद कर दी गईं और केवल दीपों की मंद रोशनी में बाबा की छवि दिव्य ज्योति की तरह चमक उठी।
महाशिवरात्रि के इस विशेष मौके पर किन्नर रविशा ने दर्शन उपरांत कहा कि आज महाशिवरात्रि का महापर्व है और यह बाबा की आराधना का विशेष दिन है क्योंकि धरती पर सबसे पहले महादेव ने ही अर्धनारीश्वर रूप लिया था। इस महापर्व को लेकर देशभर से दूर-दूर से दर्शन करने आए भक्तों में भी भारी उत्साह देखा गया, जिन्होंने घंटों कतार में लगने के बाद बाबा महाकाल के दर्शन कर मंदिर परिसर को जयकारों से गुंजायमान कर दिया।
पंडित आशीष पुजारी ने बताया कि सामान्य दिनों में भस्म आरती तड़के 4 बजे होती है, लेकिन महाशिवरात्रि की विशेष परंपरा के चलते अब अगली भस्म आरती 16 फरवरी की दोपहर 12 बजे की जाएगी। इसके पहले बाबा महाकाल को सवा क्विंटल फूलों और सप्तधान से सेहरा सजेगा। इसके बाद दोपहर में भस्म आरती होगी।
चलित व्यवस्था के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं ने कतार में चलते हुए और एलईडी स्क्रीन के जरिए इस अलौकिक दृश्य का लाभ लिया। बाबा महाकाल के दर्शन कर निहाल हुए भक्तों ने पूरे उत्साह के साथ बाबा महाकाल के जयकारे लगाए और पूरे दिन-रात पूजन का यह क्रम अनवरत जारी रहेगा।












