कलेक्टर की सख्ती – नायब तहसीलदार निलंबित, मगर किरनापुर पुलिस अब तक मौन

कलेक्टर की सख्ती – नायब तहसीलदार निलंबित, मगर किरनापुर पुलिस अब तक मौन!
आधी रात पत्रकार के घर पहुंचे रेत माफिया और तहसीलदार, दीवार फांदकर पोर्च तक पहुंचे – हाथों में डंडे, परिवार में दहशत
पत्रकारों ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन, न्याय की गुहार लगाई
बालाघाट/किरनापुर।
पत्रकार पर आधी रात हुए हमले के मामले ने अब पूरे जिले में प्रशासनिक हलकों को हिला दिया है। बालाघाट जिले के किरनापुर में पत्रकार इंद्रजीत दशमेर के घर घुसने की कोशिश करने वाले नायब तहसीलदार किरनापुर केशोराव टेकाम को कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। हालांकि घटना में शामिल अन्य लोगों और रेत तस्करों पर अभी तक किरनापुर पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पत्रकारों ने सौंपा ज्ञापन, न्याय की लगाई गुहार
मामले में न्याय की मांग को लेकर बालाघाट जिले के पत्रकारों ने एकजुट होकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बालाघाट को ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने मांग की है कि न केवल रेत तस्करों पर, बल्कि थाना स्तर पर कार्रवाई दबाने वाले जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर भी कठोर कदम उठाए जाएं।
आधी रात का खौफ – डंडे लेकर पहुंचे तहसीलदार और रेत तस्कर
पत्रकार इंद्रजीत दशमेर, जो अनादि टीवी भोपाल के जिला संवाददाता हैं, ने बताया कि 22-23 सितंबर की रात करीब 2:15 बजे उनके घर पर नायब तहसीलदार केशोराव टेकाम और उनके साथ आए कुछ संदिग्ध लोग पहुंचे।
परिवार के अनुसार, “रात में बोलेरो गाड़ी घर के बाहर आकर रुकी, फिर किसी ने दरवाज़ा खटखटाया। जब खिड़की से देखा तो तहसीलदार टेकाम नीली शर्ट और काली पैंट में खड़े थे। उनके साथ ओमप्रकाश लिल्हारे और दो अन्य लोग थे, जिनके हाथों में डंडे व पाइपनुमा वस्तुएं थीं।
पत्रकार ने बताया कि जब उन्होंने आवाज लगाई कि “रात के दो बजे हैं, सुबह बात करेंगे”, तो वे लोग गली में घूमते रहे। डरे-सहमे परिवार ने तुरंत डायल 112 पर कॉल किया, लेकिन पुलिस करीब 20 मिनट बाद पहुंची। तब तक सभी आरोपी फरार हो चुके थे।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं
अगले दिन पत्रकार ने थाना किरनापुर में लिखित शिकायत दी। तीन दिन बाद उनके और उनकी पत्नी के बयान भी दर्ज किए गए, मगर अब तक न तो FIR दर्ज हुई और न ही किसी आरोपी पर कार्रवाई हुई।
पत्रकार का आरोप है कि “थाना प्रभारी को पूरी जानकारी देने के बावजूद कार्रवाई न होना, स्पष्ट करता है कि स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक तंत्र में कहीं न कहीं मिलीभगत है।”
कलेक्टर की त्वरित कार्रवाई, लेकिन पुलिस की चुप्पी सवालों में
घटना की जानकारी पत्रकार ने उसी रात मीडिया ग्रुप और कलेक्टर बालाघाट को दी। कलेक्टर ने तत्काल संज्ञान लेते हुए नायब तहसीलदार टेकाम को निलंबित कर दिया। लेकिन पुलिस की निष्क्रियता ने पूरे प्रकरण को विवादास्पद बना दिया है।
पत्रकार का बयान – “दरवाज़ा खोल देता तो शायद जिंदा न होता”
पत्रकार इंद्रजीत दशमेर ने कहा,
अगर उस रात मैंने दरवाज़ा खोल दिया होता, तो शायद आज जिंदा न होता। यह घटना प्रशासनिक दबंगई और पत्रकारिता की आवाज़ को कुचलने की कोशिश है।
थाना प्रभारी किरनापुर पर उठे सवाल
पत्रकारों का आरोप है कि किरनापुर थाना क्षेत्र में लगातार अपराध बढ़ रहे हैं और अपराधियों पर कार्रवाई नहीं की जा रही। इससे थाना प्रभारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। कई मामलों में उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा चुके हैं।
अब पत्रकारों की एकजुटता – न्याय की उम्मीद
पत्रकार संगठनों ने स्पष्ट कहा है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे चरणबद्ध आंदोलन करेंगे।
पत्रकारों ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और शासन से संपूर्ण निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।













